गुरुवार, 30 सितंबर 2010

चलता-फिरता पुस्तकालय


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samagri1

4 टिप्‍पणियां:

  1. खुला आसमान पर आकर प्रसन्नता अनुभव हुई।शुभकामनाएं!
    ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग http://hindisopan.blogspot.com पर आपका स्वागत है।

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  2. यह एक अच्छा प्रयास है। छात्रों के सामने रचनाएँ ऐसी खुली रहें तो ज़रूर लाभदायक ही होगा। बधाइयाँ। रवि, कण्णूर.

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